समंदर की तरह खामोश रहना, फितरत है हमारी,
हम अपनी गहराई का, कभी शोर नहीं करते।...
वक्त आने पर खुद ही, किनारे झुक जाएंगे,
हम अपनी लहरों पे, कभी गुरूर नहीं करते।
गिरने का खौफ होता, तो चलना ना सीखते,
सूरज की तरह रोज़ यूं, जलना ना सीखते।...
ये तो अंदर की आग है, जो बुझने नहीं देती,
वरना तूफानों से हम भी, लड़ना ना सीखते।
वक़्त ने सिखा दी है, खामोशी हमको,
अब हर किसी से हम, शिकायत नहीं करते।...
छोड़ दिया है हमने, लोगों को मनाना,
जाने वालों की हम, मिन्नत नहीं करते।
चेहरे की मुस्कान के पीछे, ना जाने कितने दर्द छुप जाते हैं,
जो अंदर से टूट चुके हों, वो बाहर अक्सर ज़ोर से मुस्कुराते हैं।
दुनिया को लगता है कि, इन्हें कोई बात कभी सताती नहीं,...
पर इनके सीने में वो आग है, जो बाहर कभी नज़र आती नहीं।
ये वो मुसाफ़िर हैं जो अपने, आँसुओं को भी ताकत बनाते हैं,
और हर बार गिरने के बाद, एक नई शुरुआत करके दिखाते हैं।
पाने की चाहत में इंसान, दिन-रात एक कर देता है,
ना मिले अगर तो ये ज़रा भी, सब्र नहीं करता।
और जब आ जाती है वही चीज़, इसके अपने हाथों में,...
तो सच है कि इंसान फिर उसकी, कदर नहीं करता।
दौड़ता रहता है उम्र भर, बस नई ख्वाइशों के पीछे,
जो पास है सुकून से उस पे, ये शुक्र नहीं करता।
इंसान की आदत है,
ना मिले तो सब्र नहीं करता, ...
और मिल जाए तो क़दर नहीं करता।
रास्ते खुद बनाने वालों को, किसी सहारे की ज़रूरत नहीं होती,
और सच्ची लगन के बिना, कोई भी मंज़िल पूरी नहीं होती।
हम अपनी धुन में मगन हैं, बस अपने काम पर ध्यान है,...
इसी सच्चाई और मेहनत में, अब बसती हमारी जान है।
एक दिन ये खामोश पसीना ही, अपना पूरा असर दिखाएगा,
और बिना कोई शोर किए ही, हर सपना सच हो जाएगा।
ना किसी से होड़ है कोई, ना किसी से कोई लड़ाई,
हमने तो बस अपने सपनों से, एक पक्की शर्त लगाई।
रास्ते में कांटे भी मिलें, तो हँस कर उन पर चल देंगे,...
हम अपनी सच्ची मेहनत से, हर मुश्किल का रुख बदल देंगे।
दुनिया को चिल्लाने दो, हम खामोशी से काम करेंगे,
बिना किसी को गिराए ही, एक दिन हम अपना नाम करेंगे।
रातों की नींदें छोड़ कर, हमने कुछ ख्वाब सज़ाए हैं,
दुनिया की भीड़ से अलग, हमने अपने रास्ते बनाए हैं।
कोई भी रुकावट अब, इन कदमों को रोक नहीं पाएगी,...
ये मेहनत की आग ही एक दिन, हमारी पहचान बताएगी।
बस कुछ दिन की बात है, फिर एक नया सवेरा लाएंगे,
हम अपने पसीने की ताकत से, अपनी दुनिया खुद बसाएंगे।
बिना शोर किए हम अपनी, एक नई राह बनाते हैं,
मेहनत की भट्टी में खुद को, चुपचाप तपाते हैं।
ना किसी को गिराना है, ना किसी से आगे निकलना है,...
हमें तो बस अपने ही, गुज़रे हुए कल से बेहतर बनना है।
ये खामोशी ही एक दिन, हमारी सच्ची पहचान बताएगी,
जब जीत हमारी इस दुनिया में, अपना शोर मचाएगी।
होठों पे सच्ची मुस्कान और, सीने में हौसला रखते हैं,
हम बुराई से हमेशा ही, एक मीठा सा फासला रखते हैं।
किसी का बुरा सोच कर, कभी भी आगे नहीं बढ़ना है,...
हमें तो अपनी मेहनत की, बस नई सीढ़ियां चढ़ना है।
ये दुनिया एक दिन हमारे, इन अच्छे कर्मों को मान लेगी,
बिना कोई आवाज़ किए ही, ये जीत हमें पहचान लेगी।
रास्तों की हर मुश्किल को, हम हँस कर पार करेंगे,
अपनी सच्ची मेहनत से, हम अपने सपने साकार करेंगे।
किसी को नीचा दिखाना, हमारी फितरत में शामिल नहीं,...
बिना कोशिश के रुक जाना, हमारी आदत में शामिल नहीं।
एक दिन अपनी इस लगन से, हम आसमान को छू जाएंगे,
बिना कोई शोर मचाए ही, हम इस दुनिया पर छा जाएंगे।
हम अपनी मेहनत की आग में, चुपचाप जलना जानते हैं,
गिर भी जाएं सौ बार अगर, तो खुद संभलना जानते हैं।
ना किसी से कोई जलन है, ना किसी से कोई होड़ है,...
अपनी ही मंज़िल से बस, अपना सच्चा एक जोड़ है।
वक़्त लगेगा थोड़ा मगर, हम अपनी राह बना लेंगे,
अपनी इसी सच्चाई से, हम एक नई पहचान बना लेंगे।
सूरज की तरह चमकना है, तो तपना भी पड़ेगा,
अपनी हर एक मुश्किल से, अकेले लड़ना भी पड़ेगा।
यूँ भीड़ का हिस्सा बनना, मेरी फितरत में नहीं है,...
और हार मान कर बैठना, मेरी आदत में नहीं है।
जो लोग कहते हैं नामुमकिन, उन्हें सच कर दिखाऊंगा,
मैं अपनी ज़िद और मेहनत से, नया इतिहास बनाऊंगा।
रात चाहे कितनी गहरी हो, नया सवेरा लाना होगा,
अपने ही हाथों से तुमको, अपना दीप जलाना होगा।
जो बैठे हैं आस लगाए, वो जीवन भर पछताते हैं,
जो खुद मेहनत करते हैं, वो मंज़िल को पा जाते हैं।
मत पूछो इस दुनिया से कि, आगे क्या होने वाला है,
तू अपने पसीने की ताकत से, हर सपना सच करने वाला है।
राहों के ये बड़े पहाड़ भी, छोटे लगने लग जाएंगे,
जब हौसले तेरे सीने में, तूफ़ान बन कर छाएंगे।
दूसरों की जीत पे रोने से, क्या हासिल हो पाएगा,...
तू खुद अपनी इस मेहनत से, अपना नया आसमान बनाएगा।
गिरने से डरना कैसा है, हर ठोकर एक सीख सिखाती है,
जो रुकता नहीं मैदानों में, जीत उसी के पास है आती।
चेहरे पर इक सच्ची मुस्कान और सीने में अंगारा रख,
तू अपनी इस सच्ची कोशिश को, सबसे ज़्यादा प्यारा रख।
ये दुनिया तो बस देखेगी, तेरी इस ऊँची परवाज़ को,
तू अपनी मेहनत के दम पर, बदल दे इस सारे अंदाज़ को।
जब तक साँसें चलती हैं तन में, रुकने का ना नाम ले तू,
अपनी जीत के इस परचम को, हर दिशा में थाम ले तू।